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सरकार से उत्तर मांगा कि कैसे कुछ माईन्स की लीज आपने 50 साल के लिए बढ़ा दी?

अभी 100 दिन पर मैंने सुना है इनके एक मंत्री कह रहे थे कि रिकोर्ड तोड़ दिया, 30 बिल पास हो गए। इस एक टिप्पणी से एक बात समझ आती है - सरकार का चरित्र। इस सरकार का चरित्र ये है- कितनी ऊंची प्रतिमा, कितनी स्पीड की ट्रेन, कितने बिल पास हुए, कितनी सीटें हम ले आए, कितने राज्य हमारी पार्टी को मिल गए। आपने काम क्या किया, आपने प्रक्रिया क्या फोलो की, उस पर निल बटे सन्नाटा। मानतें हैं कि आपके पास राज्य आ गए, मानते हैं आपने 30 बिल पास कर दिए होंगे, बिल पास करने की प्रक्रिया होती है, स्टेंडिग कमेटी होती हैं, पार्लियामेंट्री प्रोसिजर होता है, क्या आपने वो फोलो किया- नहीं। उसका एक ज्वलंत उदाहरण हम आपके सामने अभी पेश करेंगे। तो सिर्फ चुनाव जीत जाना अगर आपकी अचीवमेंट है, तो बिल्कुल आपने बहुत कुछ अचीव कर लिया। सरकार चलाना और पारदर्शिता से चलाना, संस्थाओं को अपना काम स्वतंत्रता से करने देना, इसमें आप शून्य पर हैं, शून्य से भी नीचे हैं।

By: वतन समाचार डेस्क
Shri Pawan Khera, Spokesperson AICC addressed the media today at AICC Hdqrs.

श्री पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि  सरकार के 100 दिन पूरे होने पर कई कार्यक्रम हुए, कई ब्लॉग लिखे गए, आर्टिकल लिखे गए, चर्चाएं हो रही हैं। एक हिंदी की हॉर्रर फिल्म थी – ‘100 days’,  मैंने तो देखी थी, आपमें से कितनों ने देखी थी, मुझे नहीं मालूम। इन पिछले 100 दिनों के बारे में आपने कई और मेरे वरिष्ठ सहयोगियों से सुना होगा, मैं उस विषय में ज्यादा नहीं बोलूंगा। लेकिन जिस तरह से पिछले 5 साल और तीन-चार महीने से, जो पार्टी नोशनल लोस, नोशनल का दम भरते हुए सरकार बना कर बैठी है, वहाँ एक्चुअल लोस जो हो रहे हैं, During our days, there was a CAG, who spoke of notional losses. During their days, we see there is a notional CAG, सीएजी है ही नहीं, ऐसा लगता है। संस्थाएं अब नोशनल हो गई हैं इस सरकार में, वो हैं या नहीं, नहीं मालूम। 

अभी 100 दिन पर मैंने सुना है इनके एक मंत्री कह रहे थे कि रिकोर्ड तोड़ दिया, 30 बिल पास हो गए। इस एक टिप्पणी से एक बात समझ आती है - सरकार का चरित्र। इस सरकार का चरित्र ये है-  कितनी ऊंची प्रतिमा, कितनी स्पीड की ट्रेन, कितने बिल पास हुए, कितनी सीटें हम ले आए, कितने राज्य हमारी पार्टी को मिल गए। आपने काम क्या किया, आपने प्रक्रिया क्या फोलो की, उस पर निल बटे सन्नाटा। मानतें हैं कि आपके पास राज्य आ गए, मानते हैं आपने 30 बिल पास कर दिए होंगे, बिल पास करने की प्रक्रिया होती है, स्टेंडिग कमेटी होती हैं, पार्लियामेंट्री प्रोसिजर होता है, क्या आपने वो फोलो किया- नहीं। उसका एक ज्वलंत उदाहरण हम आपके सामने अभी पेश करेंगे। तो सिर्फ चुनाव जीत जाना अगर आपकी अचीवमेंट है, तो बिल्कुल आपने बहुत कुछ अचीव कर लिया। सरकार चलाना और पारदर्शिता से चलाना, संस्थाओं को अपना काम स्वतंत्रता से करने देना, इसमें आप शून्य पर हैं, शून्य से भी नीचे हैं। 

अभी माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक नोटिस जारी किया। सरकार को question किया, सरकार से उत्तर मांगा कि कैसे कुछ माईन्स की लीज आपने 50 साल के लिए बढ़ा दी? ऑक्शन नहीं किया, जो रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से आपने कानून बदल दिया कि 2015 का जो एक्ट है, The Mines & Minerals Regulation Development Act 2015,  ये 2015 में जो संशोधन हुआ था, उससे पहले की जितनी लीज हैं, उन सबको 50 साल का आपने एक्सटेंशन दे दिया। मुझे याद है कि स्वर्गीय अरुण जेटली जी ने बहुत शार्प, बड़ा तीखा ब्लॉग लिखा था, Auction should be the route. तब वो विपक्ष में थे, सुप्रीम कोर्ट ने भी ऑक्शन की बात की। अब जब सरकार भारतीय जनता पार्टी की है तो ये 358 माईन्स की लीज आपने रिन्यू कर दी, कोई ऑक्शन का रुट नहीं लिया क्यों? 288 अभी और पेंडिग हैं, जो क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं, वो भी हो जाएगा।

5 महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने आपको नोटिस दिया, आपसे जवाब मांगा, तब आप व्यस्त थे, आपको सीटें बढ़ानी थी। अगस्त के प्रथम सप्ताह में फिर से सुप्रीम कोर्ट ने इनको 3 हफ्ते का समय दिया, वो भी समाप्त हो गया, अभी तक जवाब नहीं गया है। तो जब आप विपक्ष में होते हैं तो आपका काव्य पाठ होता है, अब जब आप सत्ता में हैं, तो आप इस मामले पर एक दम चुप हैं। आपकी गतिविधियों में और आपकी उस वक्त की बातों में ना सुर, ना ताल, ना कोई तालमेल है। आखिर ऐसा क्या कारण रहा कि आपने ऑक्शन का रुट नहीं लिया? ऐसे कौन से उद्योगपति हैं, जिनको आप ऑब्लाईज करना चाहते थे, आनन-फानन में आपने वो बिल पास करवा दिया? उस वक्त जब ये बिल पास हो रहा था, 11 मार्च, 2015 को, सिलेक्ट कमेटी, जिसके भूपेन्द्र यादव अध्यक्ष थे, उनको कहा गया, उस वक्त हमारे सांसद मणिशंकर अय्यर थे और गुलाम नबी आजाद ने बड़ा रोष व्यक्त किया था कि किस तरह से आप बिल पास करवा रहे हैं, आप इन्हें सिलेक्ट कमेटी में क्यों नहीं भेजते, लोगों का ओपिनियन क्यों नहीं लेते? 2015 की बात मैं आपको बता रहा हूं। लेकिन जैसा कि इस सरकार की आदत है, उन्होंने इस बात को बिल्कुल नहीं माना। इस सरकार के कुछ मंत्रियों ने भी प्रोटेस्ट किया।

“We are deeply disappointed and distressed to note that the Government of India has inserted and amended its Section 8 and a new Section 8-A in the MMDR Act to extend the validity of all existing leases including those under second and subsequent renewal.” ये सारे डिटेल मैं आपको दे रहा हूं। राज्यों को राजस्व इस ऑक्शन के रुट से आता है, ओडिशा को, झारखंड को, बिहार को, राजस्थान को, मध्यप्रदेश को, तमाम राज्यों को आता है। अब हम जानते हैं कि राज्यों की आर्थिक स्थिति क्या है, आपने अपने लालच में राज्यों का वो अधिकार भी छीन लिया, जिससे उनको राजस्व प्राप्त हो सकता। You snatched the rights of the States who could have earned some revenue through the auction route. After all there is a federal structure in this country. You had a lot of slogans about federalism when you came to power. लेकिन सत्ता में आने के बाद आपने उस फेडरल स्ट्रक्चर के साथ कितना मजाक किया, कई उदाहरण हैं उसके, उनमें से एक उदाहरण है कि आपने उनके राजस्व प्राप्ति के रास्ते बंद कर दिए, ताकि राज्य आपकी ओर ताकते रहें, आपकी ओर देखते रहें, हाथ फैला कर बैठे रहें। याद होगा आपको बिहार चुनाव के पहले मोदी जी बिहार गए थे, कितना चाहिए, कितने हजार करोड़ चाहिएं, आपने देखा होगा। ये संपदा, इस संपदा को आप ऑक्शन करते, पारदर्शिता रहती, तो एक्चुअल गेन होते देश को, राज्य सरकारों को।

हम ये जानना चाहते हैं कि पार्लियामेंट्री स्टेंडिग कमेटी को ये बिल रिव्यू के लिए क्यों नहीं भेजा गया या नंबर बढ़ाने थे कि इस एक साल में इतने बिल पास हो गए? जब सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में और 2014 में स्पष्ट तौर पर कहा था कि Auction should be the preferred route for alloction of natural resources unless some more financially feasible route is found, ये सुप्रीम कोर्ट की भाषा है। Why did you choose this route? ना तो ये अलट्रानेटिव रुट है, जिसमें आपने कोई बहुत आर्थिक बचत कर ली हो देश के लिए, ना ये ऑक्शन है। ये सिर्फ आपके कुछ दोस्तों को लाभ पहुंचाने की चेष्ठा है, और कुछ नहीं है।

मेरे मित्र और काबिल सहयोगी मोहम्मद जी ने इसका जो  कानूनी ऑस्पेक्ट है, इस पर बहुत रिसर्च की है, कुछ भी प्रश्न हो, पहले इस मुद्दे पर बात करना चाहेंगे। इसमें बहुत बड़ा लोस हुआ है, जो एस्सेमेंट है, हम नोशनल और उसकी बात नहीं करना चाहते वो विनोद राय साहब ज्यादा समझते हैं और ये सरकार ज्यादा समझती होगी। हम एक्चुअल बात करते हैं, 4 लाख करोड़ के राजस्व की हानि तो मिनिमम इसमें मान कर चल रहे हैं कि इस रास्ते पर चलकर आपने इतना नुकसान देश को पहुंचाया है। लाभ किसको हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए। लाभ किसने पहुंचाया, ये प्रश्न सबके सामने है, उत्तर हम सबको मालूम है, लेकिन हम चाहते हैं कि जांच हो। कितना लाभ पहुंचाया, जांच के दायरे में ये भी आए। क्यों किया गया, जांच के दायरे में ये भी आए। गिल्टी के साथ आप क्या करने वाले हैं, जांच के दायरे में ये भी आए, हो सकता है आप स्वयं गिल्टी हों।

एक प्रश्न पर कि आपको क्या लगता है कि इसमें घोटाला है, श्री खेड़ा ने कहा कि आपको क्या लग रहा है? जब सुप्रीम कोर्ट दो बार कह चुका है, Auction should be the route. आप संशोधन लाते हैं कि पुरानी लीज को 50 साल के लिए रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से एक्सटेंशन हो जाए, आखिर क्यों? मैं एक बार और पढ़कर सुनाता हूं- “All mining leases granted before the commencement of the Mines & Minerals Regulation Amendment Act 2015, ये उसी बिल की भाषा है, जो एक्ट बना, shall be deemed to have been granted for a period of 50 years, shall be extended and deemed to have been extended upto period ending on 31st March 2020 with effect from the date of expiry of the renewal last made or till the completion of renewal period. इस तरह से 50 साल, or 50 years from the date of grant of such lease. ये सरेआम हुआ और जिस तेजी से काम हुआ, उतना तेजी से मोदी जी कभी ट्वीट भी नहीं करते, उतनी तेजी से ये काम हुआ।  

To a question about the reaction of the Congress Party on these amendments passed in 2015, Shri Khera said we did not issue a whip but our protest was very loud, very well reported.

एक अन्य प्रश्न पर कि आप इस घोटाले को कितना बड़ा मानते हैं, दूसरा जिस तरह का ये घोटाला है, पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट क्यों नहीं हो रहा है, श्री खेड़ा ने कहा कि हम जो कर सकते हैं, वो संसद में भी किया और आगे भी करेंगे। हमारी तरफ से, पार्टी की तरफ से आरटीआई भी इसमें आज ही लगाई गई है और मुझे लगता है कि जिस विपक्ष की आप बात कर रहे हैं, वो भी अच्छी तरह समझते हैं कि किस तरह से उनके अपने राज्य में किस तरह से राजस्व को नुकसान पहुंचाया है। इस मुद्दे पर सब जरुर परेशान हैं, जरुर समझते हैं कि क्यों और आखिर क्या कारण है कि राज्यों को राजस्व नहीं गया और इस रुट से, बिना ऑक्शन के ही आपने दे दिया? तो ये मुद्दा ऐसा है जो सबको प्रभावित करता है।

एक अन्य प्रश्न पर कि जैसा कि आप आरोप लगा रहे हैं कि इतना बड़ा घोटाला है, क्या आप सर्वोच्च न्यायालय में जाएंगे, श्री खेड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का नोटिस सरकार को 5 महीने पहले गया, जवाब नहीं आया। अब एमिक्स क्यूरी (Amicus curie) भी अपोयंट हो गए हैं, 3 हफ्ते समाप्त हो गए हैं, सुप्रीम कोर्ट से 2 अगस्त को आखिरी नोटिस गया था। तो कोर्ट जो कर रहा है, वो तो कर ही रहा है, हमने अभी आरटीआई भी लगाई है। हम आज आपकी अदालत में भी आए हैं।

To another question as to whether this should be probed or should be reauctioned, Shri Pawan Khera said Yes there should be a probe and the guility have to be punished, they have to be brought to the book, what is the loss to the exchequer, who is responsible for this and Yes, of course, there should be auction.

Shri Pawan Khera added that Odisha Mines Minister Shri Malik also said that as the existing leases has no vested right for the second and subsequent renewal and considering the fact that they have already enjoyed the largesse of mineral concession for more than 50 years, the State Government has decided not to grant second or subsequent renewal. This is a State Government decision and yes it was over-ridden by the Centre. This is one example. Odisha is ruled by one of the regional party. आपने विपक्ष की बात की, तो सबसे पहला एक उदाहरण जो ओडिशा का दिया, वो बड़ा स्पष्ट हो जाता है कि 50 साल तो वो ओलरेडी कर चुके हैं।

एक अन्य प्रश्न पर कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री लद्दाख और जम्मू-कश्मीर को लेकर यूएनएचआरसी में मुद्दा बनाने की बात कर रहे हैं, श्री खेड़ा ने कहा कि उनके विदेश मंत्री जब यूएनएचआरसी में मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं, उसी वक्त मसूद अजहर आजाद हो जाता है, आजाद होकर जो उलूल-जलूल वो बातें कर रहा है, वो आपने भी सुनी, तो किस मुँह से वो यूएनएचआरसी के सामने अपना चेहरा दिखाएंगे? ये समझने की बात है। As we speak Maulana Masood Azhar is issuing threats to Indian forces and openly advising terrorists to attack the security forces of our country. How can the Minister of Pakistan with what face, will he talk to the UNHRC, talking anything on Kashmir when they have so much to hide. Pakistan stands exposed all over again today. एक बार फिर से मौलाना मसूद अजहर की रिहाई से पाकिस्तान के चेहरे का नकाब आज हट चुका है और मौलाना मसूद अजहर जिस तरह की टिप्पणियां कर रहा है, उससे पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ये समझना होगा कि पाकिस्तान का असली चेहरा क्या है, पाकिस्तान की कश्मीर के मुद्दे पर भूमिका क्या है और कैसे पाकिस्तान बाहर विदेशों में जाकर कुछ बोलता है और करता कुछ और है।

 

एनआरसी के मुद्दे पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि सभी बोलते आए हैं, जैसा आपने बताया अब तो सांस्कृतिक संगठन भी बोलने लग गए हैं। तो बात तो गंभीर है कि अगर एक सांस्कृतिक संगठन को भी एनआरसी के मुद्दे पर बोलना पड़ गया तो लगता है कि मामला गंभीर है।

पाकिस्तान के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि पाकिस्तान, एक जो स्टॉप वॉच होती है, इस मामले में वो कई बार घूम चुकी है और फिर से दोहराता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इसमें तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि हमारी सरकार भी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ये सुनिश्चित करेगी कि जल्द से जल्द पाकिस्तान एफटीएफ के तहत इसमें ब्लैक लिस्ट हो ।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आपको लगता है कि श्रीमती सोनिया गांधी जी के अध्यक्ष बनने के बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश के अंदर जो गुटबाजी हो रही थी, वो थम गई है, श्री खेड़ा ने कहा कि सबसे ज्यादा आरोप किसी पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर अगर लगते थे, तो हम पर लगते थे और सबसे ज्यादा बात भी हमसे पूछी जाती है कि आपके उस नेता ने ये कहा, प्रेशर टेक्टिक का उसको दर्जा दे देते हैं। मैं कई बार कह चुका हूं कि हमारे यहाँ हम दो और हमारे बाद कोई नहीं वाली परंपरा नहीं है। हमारे यहाँ अपनी बात उठाने के लिए सब स्वतंत्र हैं। हाँ, प्रयास ये रहता है कि पार्टी के मंचों से उठाएं, बाहर से ना उठाएं, हर संस्था का ऐसा प्रयास रहना चाहिए, हर संगठन का रहना चाहिए। लेकिन ये कहना कि प्रेशर टेक्टिक है, इसलिए निर्णय लिए गए, गलत है। हमारे यहाँ ये परंपरा नहीं है कि किसी ने आज कुछ कह दिया तो सुबह डर के मारे मार्निंग वॉक पर जाना बंद करे दें, ऐसा नहीं होता है। हमारी पार्टी में एक परंपरा है, आप बिल्कुल बोलिए, आप सब बोलने के लिए स्वतंत्र है। जिस स्वतंत्रता की लड़ाई हमने लड़ी है, आज वही तो खतरे में है।

हरियाणा के रोहतक में एक रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दिए बयान कि देश में आज इसरो स्पिरिट व्याप्त है के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि हिंदुस्तान में सदैव इसरो स्पिरिट रही है, मोदी जी ने 2014 से पहले के हिंदुस्तान को जानने की कभी चेष्ठा ही नहीं की, इसलिए आज समस्याओं से जूझ रहे हैं। जिस दिन वो समझ लेंगे, उस दिन वो समस्याओं का निराकरण भी कर लेंगे। ट्रकें भरने की जहाँ बात होती है, अब क्या भरकर कहाँ जाता है, किन राज्यों से, किसके घर में क्या जाता है, उसका जवाब आपको बहुत जल्दी मिलने लगेगा।  

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