Updates

Hindi Urdu

मुंबई कांग्रेस को बेचने का मामला सोनिया राहुल और प्रियंका तक

मुंबई कांग्रेस को बेचने का मामला सोनिया राहुल और प्रियंका तक पहुंचा, जल्द हो सकता हैं बड़ा फैसला

By: मोहम्मद अहमद
फाइल फोटो

जानकार मानते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के साथ जाती है तो उसे नुकसान के सिवा कोई फायदा नहीं हो सकता है, क्योंकि फिर वह मराठी वोट खो देगी. वतन समाचार से बात चीत में मुंबई कांग्रेस के नेता एकनाथ गायकवाड़ ने कहा कि हां समाजवादी के साथ गठबंधन की बात चल रही हैं लेकिन यह कंफर्म नहीं है. उन्हों ने कहा कि कौन सीट दी जाएगी और कौन नहीं यह भी अभी तय नहीं है. सूत्र बताते है कि मुंबई कांग्रेस को बेचने का मामला अब सोनिया गांधी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक पहुंच चुका है और वह जल्द इस में कोई फैसला ले सकते है, क्योंकि दिल्ली के नेताओं ने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए है.

watan  samachar exclusive 

 नयी दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. सियासी जानकारों का मानना है कि यह परेशानी ऊपर से आई परेशानी नहीं है बल्कि यह कांग्रेस के नेताओं की पैदा की हुई परेशानी है जो अपने निजी हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी को हमेशा से बेचते रहे हैं. सियासी जानकार मानते हैं कि गुजरात से लेकर यूपी तक बिहार से लेकर देश के विभिन्न राज्यों में हमेशा कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं ने पार्टी के हितों की रक्षा करने की बजाय अपने हितों की रक्षा की और उन्होंने पार्टी को दूसरों के हाथों में बेच दिया.

 

 अगली खबर महाराष्ट्र से आ रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने की तैयारी में जुटी हुई है. सियासी जानकारों का मानना है कि जब कांग्रेस पार्टी का यूपी में समाजवादी पार्टी से गठबंधन नहीं है, समाजवादी पार्टी जहां की पैदावार है और 2019 के लोकसभा में सपा बसपा गठबंधन पूरी तरह से विफल हो चुका है तो ऐसे में कांग्रेस पार्टी का मुंबई में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस के कुछ नेता अपने निजी हितों की रक्षा के लिए पार्टी को बेचना चाहते है.

 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुंबई कांग्रेस के कुछ नेता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं के साथ मिल कर वह तीन सीटें (मानखुर्द भाईकल्ला और भिवंडी) समाजवादी पार्टी को देने के लिए तैयार हो गए हैं जहां पर कांग्रेस पार्टी को मानखुर्द में 44000 वोटों की बढ़त थी जबकि भाईकल्ला में 35000 और भिवंडी में 62000 वोटों की बढ़त कांग्रेस को थी.

 

 सियासी जानकार मानते हैं कि इतनी बड़ी बढ़त के बावजूद इन सीटों को एलायंस के नाम पर समाजवादी पार्टी को देना यह दर्शाता है कि पार्टी के नेता अपने हितों की रक्षा के लिए पार्टी को बेचने पर आमादा हैं, जबकि इन सीटों पर सपा पूरी तरह फेल रही थी. सियासी जानकारों का मानना है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मानखुर्द पर 27000 वोट मिले थे और मात्र 9000 वोटों से उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा था यह तब हुआ था जब 4 दिन पहले कांग्रेस के कैंडिडेट को पूरी तरह से बैठा दिया गया था और उन्होंने 4 दिन पहले सरेंडर कर दिया था.

 

जानकार मानते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के साथ जाती है तो उसे नुकसान के सिवा कोई फायदा नहीं हो सकता है, क्योंकि फिर वह मराठी वोट खो देगी. वतन समाचार से बात चीत में मुंबई कांग्रेस के नेता एकनाथ गायकवाड़ ने कहा कि हां समाजवादी के साथ गठबंधन की बात चल रही हैं लेकिन यह कंफर्म नहीं है. उन्हों ने कहा कि कौन सीट दी जाएगी और कौन नहीं यह भी अभी तय नहीं है. सूत्र बताते है कि मुंबई कांग्रेस को बेचने का मामला अब सोनिया गांधी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक पहुंच चुका है और वह जल्द इस में कोई फैसला ले सकते है, क्योंकि दिल्ली के नेताओं ने इस मामले में हाथ खड़े कर दिए है.

 

 

Maharashtra Assembly Elections in the month of October 2019, some leaders want alliance with Samajwadi Party. This is highly depressing and would prove blunder for bright prospect of winning few major seats for Congress Party in forthcoming assembly elections.
 
Reasons for Congress party to should avoid alliance with Samajwadi Party in Maharashtra Assembly Election to be held in the month of October 2019
 
1)    The most basic concept of alliance is that both parties should benefit from each other, past two poll results prove otherwise, As of now the position of Samajwadi Party in Maharashtra is absolutely non conducive and it would hardly matter as the benefit by gain in Votes as an alliance partner.
2)    During previous assembly elections, a decision was taken because of the MLA of Mankhurd Assembly, which has proved in the past two elections, Congress is losing from here and the reason for losing is not the voters but the party office bearers itself.
3)    In the Assembly Election of 2014, Congress got more than 27000 votes and the Samajwadi Party won the seat with the margin of only 9000 votes. (The reason is, congress candidate suddenly became silent and surrendered himself 4 days before polling, this may be cross-verified with local party workers and resources
4)    Samajwadi party has won single seat 171 Mankurd with anti-incumbency factor, where as Congress has traditional voters to win this seat without having any alliance
5)    When there is no Alliance with Samajwadi Party in Uttar Pradesh itself, why some leaders consider of having alliance in Maharashtra is matter of concern
6)    The seat which is being talked about to give preference to Samajwadi Party in the name of Alliance are – 
171 Mankhurd          Lead of congress in 2019 LS (44000+), 
Byculla                                                             (33000+) and 
Bhiwandi                                                       (62000+). 
 
These are three seats Samajwadi party contested under Congress alliance and all these three assembly seats have given major lead in 2019 Loksabha elections
 
7)    Congress does not need Samajwadi Party’s influence to gain Muslim votes, traditional Muslim voters are showing their favour towards Congress
8)    More then gain Congress is losing Traditional Maratha Votes just because of Samajwadi Party alliance in MLA elections
9)    Congress workers and local leaders staged a march and have conflicts on many occasions with current Samajwadi Party MLA and expecting that party workers and local leaders will work again for alliance partners MLA who has shown animosity towards them wold be fatal for the prospect of our party
10) By not contesting elections, Congress is becoming absolute in these constituencies and inactive leadership is losing party workers year on year, it is Important to (whether win or lost), we will remain politically active and alive
 
Therefore, it is local leaders and party workers aspirations that Congress avoid alliance with Samajwadi Party and encourage local leadership to fight elections with new zeal and enthusiasm.

You May Also Like

Notify me when new comments are added.

धर्म

ब्लॉग

अपनी बात

Poll

Should the visiting hours be shifted from the existing 10:00 am - 11:00 am to 3:00 pm - 4:00 pm on all working days?

SUBSCRIBE LATEST NEWS VIA EMAIL

Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.