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अरशद मदनी बोले हमें पूरी उम्मीद थी कि फैसला मस्जिद के हक में आएगा मगर ऐसा नहीं हो सका

उन्होंने आगे कहा कि भारत के संविधान में हमें जो राइट्स मिले हैं उनका इस्तेमाल करते हुए जमीअत उलमा ने कानूनी तौर पर आखरी हद तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी इसके लिए देश के नामचीन अधिवक्ताओं की खिदमात ली गई.

By: वतन समाचार डेस्क
  • अरशद मदनी बोले हमें पूरी उम्मीद थी कि फैसला मस्जिद के हक में आएगा मगर.
  • अरशद मदनी बोले हमें पूरी उम्मीद थी कि फैसला मस्जिद के हक में आएगा मगर ऐसा नहीं हो सका

 

बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद पर मंदिर के निर्माण के हक में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकारों में से एक जमीअत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मीडिया को प्रेस रिलीज जारी की है. मौलाना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद मिल्कियत मुकदमे में आज सुप्रीम कोर्ट के जरिए दिए गए फैसले पर भारत के मुसलमानों और हिंदू भाइयों से अपील है कि इस फैसले को हार और जीत के नजरिए से ना देखें और देश में शांति एकता और प्यार मोहब्बत का मामला बनाए रखें.

 

 मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि यह फैसला हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं है लेकिन सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम है. उन्होंने अपील की कि मुसलमान मायूसी का शिकार ना हो. अल्लाह पर भरोसा करें और अपनी मस्जिदों को आबाद रखे.

 

 उन्होंने आगे कहा कि भारत के संविधान में हमें जो राइट्स मिले हैं उनका इस्तेमाल करते हुए जमीअत उलमा ने कानूनी तौर पर आखरी हद तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी इसके लिए देश के नामचीन अधिवक्ताओं की खिदमात ली गई.

 

 कोर्ट के सामने तमाम सुबूत दिए गए पुराने कागजात के ट्रांसलेट करवा कर दिया गया और उनको अदालत के सामने अपने दावे को मजबूत करने के लिए रखा गया और हमें पूरी उम्मीद थी कि फैसला मस्जिद के हक में आएगा मगर ऐसा नहीं हो सका.

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