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मंत्री संतोष गंगवार को घेरने में जुटी कांग्रेस

राजीव शुक्ला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में रोजगार बढ़े, नौकरियां बढ़े, युवाओं को रोजगार बढ़े, इसकी जिम्मेदारी रोजगार मंत्री की होती है। अगर देश का श्रम और रोजगार मंत्री ये कहे कि पूरे उत्तर भारत के जो युवा हैं, वो नाकाबिल हैं, incompetent हैं, इस लायक नहीं कि उन्हें नौकरी दी जाए, फिर तो सरकार के लिए सारी समस्या ही खत्म है। अगर वो आप सबको ये कहें कि देश में जितने युवा है, सब नाकारा हैं, तो हम नौकरी कहाँ से दें, वो नौकरी के लायक ही नहीं, तो ये बहुत ही गंभीर मुद्दा है, क्योंकि इस समय रोजगार इतनी तेजी से खत्म हो रहे हैं, बेरोजगारी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि हाहाकार है युवाओं में। हमें दिल्ली में शायद उसका अहसास ना हो, लेकिन नीचे इसका बड़ा भारी असर है।

By: वतन समाचार डेस्क
Rajeev Shukla, Ex-MP, former Union Minister addressed the media today at AICC Hdqrs: फाइल फोटो

राजीव शुक्ला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में रोजगार बढ़े, नौकरियां बढ़े, युवाओं को रोजगार बढ़े, इसकी जिम्मेदारी रोजगार मंत्री की होती है। अगर देश का श्रम और रोजगार मंत्री ये कहे कि पूरे उत्तर भारत के जो युवा हैं, वो नाकाबिल हैं, incompetent हैं, इस लायक नहीं कि उन्हें नौकरी दी जाए, फिर तो सरकार के लिए सारी समस्या ही खत्म है। अगर वो आप सबको ये कहें कि देश में जितने युवा है, सब नाकारा हैं, तो हम नौकरी कहाँ से दें, वो नौकरी के लायक ही नहीं, तो ये बहुत ही गंभीर मुद्दा है, क्योंकि इस समय रोजगार इतनी तेजी से खत्म हो रहे हैं, बेरोजगारी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि हाहाकार है युवाओं में। हमें दिल्ली में शायद उसका अहसास ना हो, लेकिन नीचे इसका बड़ा भारी असर है।

 

अगर मैं आंकड़ों पर जाऊं तो जो बेरोजगारी की दर है वो 8.2 प्रतिशत हो गई है, इतना 45 साल में पहले कभी नहीं हुआ, जितनी बेरोजगारी इस समय चल रही है। यही नहीं अगर आप देखें कि सिर्फ 2018 में एक करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं, क्या सरकार का वायदा था? अपने भाषणों में इन्होंने कहा था कि हम हर साल युवाओं को 2 करोड़ नए रोजगार देंगे? यहाँ 2 करोड़ रोजगार तो चले गए, मिल ही नहीं रहे हैं और एक- एक साल में एक-एक करोड़ जो लोग नौकरी में हैं, वो निकले जा रहे हैं। तो नए रोजगार मिल नहीं रहे हैं और जो ऑलरेडी नौकरियों में हैं, वहाँ करोड़ों की संख्या में लोगों की नौकरियां जा रही हैं। तो ये भयावह स्थिति देश में पैदा हो रही है। मैं तो योजना आयोग में मंत्री था, मेरे पास तो आंकड़े आते थे, जो युवा है, हर साल देश में उसकी दर ढाई प्रतिशत बढ़ रही है, क्योंकि देश में जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ युवाओं की दर ढाई प्रतिशत की हर साल बढ़ रही है। इनको अगर आप नौकरियां नहीं देंगे तो ये क्या करेंगे, इनकी क्या हालत होगी, ये किस रास्ते पर भटक सकते हैंइसलिए ये बहुत बड़ी चिंता की बात है, इनको रोजगार दिया जाए और अगर सरकार ये कहती है कि नहीं, सभी के सभी नाकारा हैं, बेकार हैं, नौकरी लायक नहीं है, तो ये तो अजीब बात है। क्या उत्तर प्रदेश के, मध्यप्रदेश के, पंजाब के, हरियाणा के, हिमाचल के, जम्मू-कश्मीर के, राजस्थान के, झारखंड के, छत्तीसगढ़ के सब युवा नाकारा हैं, वो काबिल ही नहीं हैंअगर आप यहाँ पर उपस्थित लोगों को ही लें तो अधिकतर इन्हीं राज्यों के निकलेंगे। तो ये बहुत ही चिंताजनक बयान है। इस बयान के लिए श्रम और रोजगार मंत्री को माफी मांगनी चाहिए या वो ये कहें कि सरकार की नीति ही यही है, ये सरकार स्पष्ट करे कि “this is the policy of the Government? We think all the North Indian youths are incompetent, incapable to get any job”. Or otherwise the Minister should apologize for this statement. This is what we are demanding.

 

Another thing is that इन्होंने स्किल इंडिया प्रोग्राम शुरु किया, पिछले 5 साल में हजारों करोडों रुपया खर्च हुआ। तो जब स्किल इंडिया में आपने 16 लाख लोगों को स्किलड कर दिया, कुशल बना दिया, तो फिर जब आप कहते हैं कि युवा नाकाबिल हैं तो फिर आपने इनको स्किल इंडिया में ट्रेंनिंग क्यों दी? उसमें भी सिर्फ 30 प्रतिशत लोगों को नौकरी मिल पाई, 70 प्रतिशत जो स्किल्ड हैं, उनको भी आप नौकरी नहीं दे पा रहे हैं। इसका मतलब है कि नौकरियां खत्म होती जा रही हैं और आप इस स्थिति में नहीं हैं कि नौकरियां दे पाएं। आज चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन होता है, इंजीनियर उसके लिए फॉर्म भर रहे हैं। क्लॉस-4 की नौकरी, चतुर्थ श्रेणी की नौकरी के लिए पहले तो ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट फॉर्म भरते थे, अब इंजिनियर और एमबीए, ये सब उसके लिए अप्लाई कर रहे हैं। देश में इतना बड़ा नौकरियों का संकट हो चुका है, लेकिन सरकार के कानों पर कोई जूं तक नहीं रेंग रही है, कोई इसकी बात ही नहीं करता और अगर आप इस पर बोल दें, तो आपके ऊपर चढ़ जाएंगे, आपके खिलाफ तुरंत बयानबाजी शुरु हो जाएगी, सब सोशल मीडिया पर आपके खिलाफ अभियान शुरु कर देंगे। ये एक बहुत ही गंभीर स्थिति है। आप लोगों के जरिए सरकार का ध्यान इसकी तरफ आकर्षित करना चाहता हूं।

 

जैसे डॉ. मनमोहन सिंह जी ने कहा कि सबसे पहले सरकार को मानना पड़ेगा कि देश में आर्थिक संकट है, सरकार डिनायल मोड में क्यों बैठी है, मना क्यों कर रही है? पहले मानो कि आर्थिक संकट है। सबसे सलाह लें, आर्थिक संकट में तो सभी लोग मदद करेंगे, सभी राजनीतिक पार्टियां मदद करेंगी कि देश का भला हो। लेकिन अगर आप डिनायल मोड में होंगे कि हम किसी से बात नहीं करेंगे, किसी से सलाह नहीं लेंगे, सब अच्छा चल रहा है, अच्छा चल रहा है, हम मानते ही नहीं कि कोई आर्थिक संकट है तो आप उसका हल कैसे निकाल पाएंगे? आज एक इंग्लिश नेशनल डेली की रिपोर्ट है, अगर आप देखें तो वो काफी सिरियस है, उनके इक्नॉमिक पेज पर है, जो हमारी ये फैसिलिटी होती है, Liberalized Remittance scheme, उसमें पिछले 5 साल में 45 बिलियन डॉलर बाहर गया है। मतलब 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपया लोग देश से बाहर ले गए हैं। पहले तो ये था कि कालाधन बाहर से लाएंगे, 4 लाख करोड़ बाहर रखा है, वहाँ से आएगा, कालाधन है, वो सब आना तो दूर रहा, 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपए तो लोग बाहर लेकर गए हैं और उसी अखबार की रिपोर्ट में पूरी डिलेट में दिया है, एक्सप्रेस की रिपोर्ट में है कि ये ज्यादातर वो लोग हैं जो यहाँ से तंग आकर बाहर अपना बिजनेस सैट कर रहे हैं। ज्यादातर इंटरप्रिनोयर हैं, बिनजेसमैन हैं जो बाहर जा रहे हैं, क्योंकि उनको यहाँ ईज ऑफ बिजनेस नहीं मिल रहा है, बिजनेस की जो सुविधाएं होनी चाहिए, वो वातावरण नहीं मिल रहा है, इसलिए वो बाहर शिफ्ट कर रहे हैं। मुझे याद है 2 साल पहले फिक्की में एक लेक्चर हुआ था, एमर्जिंग मार्केट के हेड रुचिर शर्मा हैं, उन्होंने 2 साल पहले वार्न किया था, तब उनके हिसाब से 6,000 इंडियन इंटरप्रिनोयर देश छोड़कर बाहर बस गए हैं और 2 साल में तो और भी लोग चले गए हैं। तो ये नौकरियां देगा कौनअगर देश के जो इंटरप्रिनोयर हैं, उद्यमी हैं, अगर वो बाहर जा रहे हैं, बाहर पैसा खर्च कर रहे हैं, वहाँ के लोगों को नौकरियां देंगे, तो इस देश में नौकरियां कौन देगा तो आपको ईज ऑफ बिजनेस लाना पड़ेगा, लोगों के लिए ये करना पड़ेगा कि यहाँ के उद्यमी, व्यापारी बाहर ना जाएं, नहीं तो बड़ी समस्या आएगी। मैं किसी की बेवजह आलोचना करने के लिए नहीं कह रहा हूं, लेकिन इस तरफ ध्यान दिया जाए क्योंकि ये बहुत गंभीर समस्या है, जिसका धीरे-धीरे रिलाईजेशन होगा।

 

ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है कि जिसमें ये संकट ना हो, हर क्षेत्र में ये संकट है, कोई भी सेक्टर आप उठा लीजिए। ये अपने आपमें बहुत गंभीर चीज है। आपकी जीडीपी में लगातार 5 क्वार्टर से गिरावट चल रही है, पाकिस्तान से भी नीचे आपकी जीडीपी की दर जा रही है, ये हाल हो गए हैं। रुपया डॉलर से तो छोड़िए, टका से मुकाबला कर रहा है, जो बांग्लादेश की करेंसी है, ये हमारी नौबत आ चुकी है और हालात ये हैं कि जो एग्रीकल्चर है, जिस पर 60 प्रतिशत लोगों की रोजी-रोटी चलाता है, उसकी ग्रोथ भी साढ़े तीन प्रतिशत से गिरकर ढाई प्रतिशत पर आ गई है। तो ना एग्रीकल्चर सेक्टर वर्क कर रहा है, ना इंडस्ट्री वर्क कर रही है, ना मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर वर्क कर रहा है, आपके स्किल इंडिया का कोई असर कहीं हो नहीं रहा है, कहीं कुछ दिखाई नहीं दे रहा है, तो सिर्फ भाषण, बयानबाजी और विज्ञापन है, इसके अलावा नीचे जमीन पर कुछ नहीं है।

 

ये एक बहुत चिंताजनक बात लग रही है, रुपया लगातार कमजोर होता चला जा रहा है, मैन्युफैक्चरिंग 7 से 8 प्रतिशत होनी चाहिए वो घटकर 0.6 प्रतिशत है। एक्सपोर्ट नेगेटिव है, निर्यात नकारात्मक दिशा में जा रहा है, ऑटो सेक्टर में मारुति, अशोक लेलैंड के बाद अब महिंद्रा में भी 17 दिनों की बंदी है, ऑटो सेक्टर अलग से गिर ही रहा है, आपको पता है और इसके बाद जो लोग बाहर जा रहे हैं, ये सब देखते हुए लगता है कि एक बहुत बड़ा संकट सामने आ रहा है। ऐसी स्थिति में सरकार को बहुत प्रभावशाली कदम उठाने चाहिए। मुझे नहीं लगता कि जो टॉप नेतृत्व है सरकार का, वो इस दिशा में कुछ सोच भी रहा है, वो लगातार कह रहा है कि सब अच्छा है, सब बढ़िया चल रहा है, ये बोलता है।

 

तो मेरा सरकार से आग्रह, करबद्ध निवेदन है कि इस तरफ ध्यान दें, ये बहुत गंभीर संकट है। अगर युवाओं को रोजगार नहीं मिला तो देश में एक विकट स्थिति पैदा हो जाएगी क्योंकि ढाई प्रतिशत की दर से युवा बढ़ रहा है और ये कहना कि उत्तर प्रदेश, उत्तर भारत के सारे युवा नकारा हैं, बेकार हैं, They are not qualified to get job. ये एक अपने आपमें बहुत बडा अपमान हैं, इसको प्रियंका गांधी जी ने भी उठाया, इस पर ट्विटर के जरिए कमेंट किया है। कांग्रेस पार्टी की इस पर जबरदस्त और गंभीर चिंता है और सरकार को इस पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए।

 

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा अर्थव्यवस्था पर दिए बयान से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि यही तो मैंने अभी कहा कि स्थिति ये है, आंकड़े ये हैं और ये लोग मानने को तैयार नहीं है, अभी भी डिनायल मोड पर है, ये कह रहे हैं कि बहुत अच्छा, बम-बम है, बम-बम है, सब अच्छा चल रहा है, क्या कमाल बढ़िया चल रहा है तो वो तो मैं कह ही रहा हूँ, कि रविशंकर जी ने भी यही कहा, वो तो कहेंगे ही, लेकिन असलियत वो नहीं है, अभी मैं किसी चैनल पर देख रहा था कि एक प्रवक्ता ने भाजपा के प्रवक्ता को पूछ लिया कि ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं? तो वे यही भी नहीं बता पाये। तो ये तो रट-रटकर बोलते हैं ट्रिलियन, अरे भाई है क्या ट्रिलियन ये भी तो पता लगाओ न तो यही वो है।

भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री जी का जोर-शोर से जन्मदिन के आयोजन से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि जहाँ तक प्रधानमंत्री के जन्मदिन का सवाल है तो वो तो हम भी उनको शुभकामनाएं देते हैं, बधाई देते हैं ये तो श्रद्धा से हम कहते हैं कि वो दीर्घायु हों, स्वस्थ हमेशा रहें, उस मामले में हमारा कोई एतराज नहीं है, किसी का जन्मदिन मनाया जाए, जन्मदिन पर हम उनको आप लोगों के माध्यम से शुभकामनाएं देते हैं, उस पर हमारी कोई आपत्ति नहीं है।

हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में बिल्कुल चुनाव के मौके पर एनआरसी को लागू करने के बारे में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की इसमें बहुत स्पष्ट नीति है कि जो हमारा जैनुअन सिटीजन है, उसके साथ कोई छेड़खानी नहीं होनी चाहिए, जैनुअन सिटीजन के  साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और जो इल्लीगल सिटीजन हैं, उसके लिए हर सरकार में प्रयास हुआ कि इल्लीगल सिटीजन को कोई अधिकार नहीं हैं, अवैध नागरिकों को कोई अधिकार नहीं है, वैध नागरिकों के साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए, तो किसी भी राज्य का मामला हो, हमारी नीति स्पष्ट है।

इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न पर कि ऐसे नागरिकों के साथ क्या करना चाहिएश्री शुक्ला ने कहा कि अवैध नागरिकों के लिए तो हमेशा डिपोर्टेशन का रुल रहा है, हर सरकार में कोशिश होती है।

एनआरसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि जो प्रक्रिया है, वो पारदर्शी होनी चाहिए, सही होनी चाहिए, जो असम में शिकायत है, आपने देखा होगा, सभी कर रहे हैं, वो यही है कि वहाँ पर जो जैनुअन नागरिक थे, उनको भी ये कह दिया है कि वो नागरिक नहीं है, तो उसको लेकर भी काफी हंगामा हुआ सभी दलों ने किया, तो वो नहीं होना चाहिए, बीजेपी खुद कर रही है। तो ये प्रक्रिया है, प्रोसेस जो है, आइडेंटिफाई करने का that should be completely transparent and unbiased.

हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि कल हमारे जो प्रवक्ता हैं उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो त्रिभाषा फार्मुला है, इस देश में एक बार सैटल हो चुका है, वो लगना चाहिए। हिंदी हमारी राज भाषा है, उसको जितना हम बढ़ा सकें अच्छा है, लेकिन उसके साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाएं हैं, राज भाषाएं है, उनको भी प्रोत्साहित हमको करना चाहिए, We should encourage, और हिंदी, राज भाषा का भी प्रचार प्रसार होना चाहिए। भाषा को लेकर अब झगड़ा नहीं शुरु करना चाहिए। हिंदी वैसे ही बढ़ती चली जा रही है और बढ़े, ये हम सब चाहते हैं, लेकिन दवाब डालकर, कहीं कुछ करके, जो उस मुद्दे को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

श्री गुलाम नबी आजाद द्वारा कश्मीर मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर कोर्ट द्वारा दिए सकारात्मक फैसले और माननीय मुख्य न्यायधीश द्वारा कथित रुप से कश्मीर जाकर स्वयं स्थिति का जायजा लेने से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि I think, we all should welcome the statement of Chief Justice of India, because, he is also apprehensive about the situation in Jammu and Kashmir and he wants to undertake the visit to the state. I think his statement is very positive... it is a welcome statement, everybody should appreciate it. जहाँ तक गुलाम नबी आजाद साहब का सवाल है, तो उनको कोर्ट ने इजाजत दी है, गुलाम नबी जी वहाँ के मुख्यमंत्री रहे हैं और सबसे बड़ी चीज है कि सबसे सफल मुख्यमंत्री रहे हैं। एक तरह से उनको विकास पुरुष कहा जाता है, इन्होंने डेवलपमेंट को बहुत बढ़ाया। सारे लोग इस बात को जानते हैं, तो ऐसे व्यक्ति को तो इजाजत मिलनी चाहिए, वो तो वहीं के हैं, उसी मिट्टी के लाल है, उनको तो कम से कम जाने को मिलना चाहिए, तो कोर्ट ने सही फैसला दिया है।

श्री फार्रूख अबदुल्ला पर पीएसए लगाने से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि मुझे लगता है कि ये फार्रूख साहब के साथ अन्याय है। फार्रूख हमेशा से एक राष्ट्रभक्त व्यक्ति रहे हैं उनके हमेशा जितने भाषण आप उनके उठा लो, चाहे संसद में, चाहे बाहर हों, और वाजपेयी सरकार में मिनिस्टर रहा हो, वो परिवार। सभी सरकारों में रहे हैं वो, तो उनके लिए इस तरह के कानून का इस्तेमाल उचित नहीं है और उनकी उम्र और स्वास्थय भी देखा जाए तो मुझे नहीं लगता कि सरकार का ये कदम उचित है।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में कौशल विकास संबंधी उल्लेख से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि हमने ये नहीं कहा था कि सब नाकारा हैं, जब सब कहेंगे कि सब बेकार हैं, इनकॉम्पिटेंट है तो वो काम भी कहाँ कर पाएंगे। हमने तो रोजगार देने के लिए क्या-क्या संभावनाएं, कहाँ-कहाँ हो सकती हैं, वो बोला था, हम ये नहीं कह रहे थे कि नहीं सब बेकार है, इनको तो रोजगार दिया ही नहीं जाना चाहिए, इनको नौकरियाँ अच्छी नहीं मिल रही हैं क्योंकि ये नाकारा हैं। ऐसे तो यहाँ जितने उत्तर भारतीय बैठे हैं वो किसी काम के नहीं है। सब बोलने लगेंगे तो ये तो विचित्र बात है न, इस तरह का बयान सरकार से आना मुझे लगता है कि शर्मनाक बात है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शुक्ला ने कहा कि वो तो मैंने पहले ही कह दिया। मैंने पहले ही कह दिया कि सरकार डिनायल मोड में है वो मानने को ही नहीं तैयार है, मनमोहन सिंह जी ने भी यही कहा कि पहले तो ये मानें की आर्थिक संकट है, अगर कहते रहेंगे कि सब बम-बम है तो फिर क्या है, सारा हरा-हरा है तो कहने की कोई बात ही नहीं है।

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