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क्योंकि मेरा नाम रईसा अंसारी है, कोई कॉलेज ...मुझे कैसे नौकरी देगा: सब्ज़ी ...वाली महिला ने अधिकारियों को हड़काया

अगर कोई सब्जी बेचने वाली महिला फर्राटे से अंग्रेजी बोले तो इससे आपको अब अचंभित होने की जरूरत नहीं है। सच में हमारे भारत में हुनर की कमी नहीं है लेकिन हुनर की कदर करने वालों की बहुत बड़ी कमी है। बीते रोज इंदौर में कुछ ऐसा ही हुआ कि जब निगम के अधिकारी एक सब्जी बेचने वाली महिला रईसा अंसारी का ठेला हटाने पहुंचे तो उसने फर्राटे दार अंग्रेजी में अफसरों से बात की जिससे अफसर हक्के बक्के रह गए।

By: मोहम्मद अहमद
  • क्योंकि मेरा नाम रईसा अंसारी है, कोई कॉलेज या शोध संस्थान मुझे कैसे नौकरी देगा: सब्ज़ी बेचने वाली महिला ने अधिकारियों को हड़काया

 

अगर कोई सब्जी बेचने वाली महिला फर्राटे से अंग्रेजी बोले तो इससे आपको अब अचंभित होने की जरूरत नहीं है। सच में हमारे भारत में हुनर की कमी नहीं है लेकिन हुनर की कदर करने वालों की बहुत बड़ी कमी है। बीते रोज इंदौर में कुछ ऐसा ही हुआ कि जब निगम के अधिकारी एक सब्जी बेचने वाली महिला रईसा अंसारी का ठेला हटाने पहुंचे तो उसने फर्राटे दार अंग्रेजी में अफसरों से बात की जिससे अफसर हक्के बक्के रह गए।

 

शायद इसी लिए कहते हैं कि अगर आदमी पढ़ लिख कर सब्ज़ी बेचेगा तो सलीक़े से बेचेगा और यह बात रईसा अंसारी ने सच साबित कर दिया। रईस अंसारी ने सीधे-सीधे कहा कि हम कहां जाएं किसके यहां जाकर के मरें। कौन हमारे बच्चों की रोजी रोटी का बंदोबस्त करेगा।  आत्मनिर्भर बनने की बात होती है। हम 65 सालों से पुश्तैनी यह काम कर रहे हैं। मैं खुद एक डॉक्टर हूं। सरकारी नौकरी कहां से मिलेगी ? कैसे काम करने का अवसर मिलेगा ? बहुत सारे सवाल खड़े किये और प्रशासन के की पोल खोलकर रख दी और प्रशासन हक्का-बक्का रह गया। यह वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। रईस अंसारी ने धाराप्रवाह अंग्रेजी में बोलते हुए, आरोप लगाया कि नगर निगम अधिकारी सब्जी विक्रेताओं को परेशान कर रहे हैं.

 

 

इस महिला ने बाद में दावा किया कि उन्होंने इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से पीएचडी (PhD) की है. मालवा मिल चौराहे पर डॉ रईसा अंसारी ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए. वायरल वीडियो में उन्होंने कहा हम लोग क्या करें, प्रधानमंत्री या कलेक्टर के घर जाकर मर जाएं या निगम के गले पड़ें? अफसर उसकी बात सुनते ही रह गए.

 

उन्होंने कहा कि ''हम यहां 65 साल से फल-सब्जी का कारोबार कर रहे हैं. अचानक आकर कोई हमें कैसे भगा सकता है. कभी कहते हैं, लेफ्ट, कभी कहते हैं राइट, परेशान हो गए हैं. बार-बार कहते हैं यहां से जाओ. हर फल और सब्जी वाले के परिवार में 25 से 27 लोग हैं, उनका भरण पोषण कैसे करें? कई दिनों से पानी पीकर सो रहे हैं. किसी प्रकार की आमदनी नहीं हो रही. करें तो क्या करें?''

 

 

यह पूछने पर कि उन्होंने बेहतर नौकरी का विकल्प क्यों नहीं चुना, उन्होंने जवाब दिया “पहला सवाल यह है कि मुझे काम कौन देगा. मुसलमानों से कोरोनो वायरस उत्पन्न होने वाली धारणा अब आम हो गई है. क्योंकि मेरा नाम रईसा अंसारी है, कोई कॉलेज या शोध संस्थान मुझे नौकरी देने के लिए तैयार नहीं है.'' बुधवार को इंदौर में कोविड -19 से 118 लोग संक्रमित मिले जिससे ज़िले में संक्रमित मरीजों की संख्या 6,457 तक पहुंच गई है.

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