“सरहदी गांधी मेमोरियल सोसाइटी” ने राष्ट्र के नायक “खान अब्दुल गफ्फार खान” को किया याद!
संस्थापक syed jalaluddin की अगुवाई में एतिहासिक कार्यक्रम, राम पुनियानी, गौहर रजा, अशोक पांडे, रुचिका शर्मा समेत कई बुद्धजीवी हुए शामिल
सरहदी गांधी मेमोरियल सोसाइटी- sarhadi Gandhi memorial society (SGMS) और watan samachar के तत्वावधान में “आइडिया ऑफ इंडिया” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन आज यहाँ नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (IICC) में किया गया।
यह सम्मेलन महान स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खान (बादशाह खान) की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक, संवैधानिक और समावेशी मूल्यों पर आधारित “आइडिया ऑफ इंडिया” की अवधारणा पर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाना था।
सम्मेलन में देश के जाने-माने बुद्धिजीवी, लेखक, इतिहासकार, सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं के रूप में प्रो. राम पुनियानी, गौहर रज़ा, अशोक कुमार पांडेय, डॉ. रुचिका शर्मा, प्रो. अखलाक़ अहमद, जॉन दयाल, एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ज़ेड के फैज़ान शामिल रहे।
आयोजकों ने बताया कि यह सम्मेलन वर्तमान समय में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और आपसी भाईचारे जैसे मूल्यों पर संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बादशाह खान के विचारों और उनके अहिंसक संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए यह कार्यक्रम भारत की साझा विरासत और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित था।
SGMS के मुखिया और NCP के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन ने कहा, सरहदी गांधी भारत के उन स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल है, जिन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता के साथ-साथ खुलकर पाकिस्तान का विरोध किया था और पाकिस्तान बनने के बाद भी उस के मुखर विरोधी रहे। उनकी यह सोच थी की पठान हर हाल में भारत के साथ रहें और पाकिस्तानियों के बारे में उनके विचार अच्छे नहीं थे।
डॉक्टर राम पुनियानी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि, अगर नाम बदलना है तो सबसे पहले अमित शाह अपने नाम के पीछे से शाह शब्द हटाए क्योंकि यह शब्द ईरान से आया है।
वैज्ञानिक गौहर रज़ा ने कहा, सभी धर्मों को अपने धर्म के कट्टरपंथियों का विरोध करना होगा, तभी नफ़रत खत्म होगी। हमें खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को हमेशा याद रखना है क्योंकि यही लोग असली भारत थे।
इतिहासकार डॉ रुचिका शर्मा ने कहा, मैंने अपने दादा दादी से ही खान अब्दुल गफ्फार खान के बारे में सुना है, जिसके बाद मैंने उनके बारे में जाना और पता चला कि खान अब्दुल गफ्फार खान ने ही एकता और भाईचारे की बात कही थी।
प्रोफ़ेसर अखलाक अहमद ने कहा, खान अब्दुल गफ्फार खान भारत की आजादी के बाद भी पाकिस्तान की जेल में बंद थे। वक्ताओं ने कहा कि भारत की संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा हमने आज गांधी को भुला दिया है जैसे गौतम बुद्ध के सिद्धांत को भुला दिया।
कार्यक्रम के अंत में महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत दादा पवार को भी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का संचाल वतन समाचार के संपादक मोहम्मद अहमद ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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