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मोदी सरकार ने NRC लाने के दिए संकेत, सुप्रीम कोर्ट में रखा अपना मत

अब जबकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संप्रभु देश के लिए एनआरसी आवश्यक है और दूसरी तरफ देश करोना जैसी भयंकर वायरस से जूझ रहा है ऐसे में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में यह कहना कि देश के लिए आवश्यक है बहुत सारे सवाल खड़ा करता है. एक तरफ सरकार लोगों को पीएनआरसी और CAA के खिलाफ प्रदर्शनों से हटाने में जुटी है और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार का यह मत बहुत सारे सवाल खड़ा करता है. सरकार ने देश के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी पर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि यह किसी भी संप्रभु देश के लिए आवश्यक अभ्यास है. नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को चैलेंज करने वाली एक याचिका पर बीसी जोशी डायरेक्टर मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स ने सुप्रीम कोर्ट में 17 मार्च को एक एफिडेविट फाइल किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि संप्रभु देश के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन एनआरसी आवश्यक है.

By: वतन समाचार डेस्क
फाइल फोटो
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CAA NRC और एनपीआर पर पूरे देश में घमासान करोना वायरस के बीच भी जारी है. इस बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एनआरसी को लेकर अपना मत स्पष्ट किया है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा है कि संप्रभु देश के लिए एनआरसी आवश्यक है. ज्ञात रहे कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलीला मैदान से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा था कि अभी एनआरसी पर कोई चर्चा ही नहीं हुई है. उन्होंने यह भी कहा था कि देश में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है. इसके बाद लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया था कि जब एनआरसी पर कोई चर्चा ही नहीं हुई है तो फिर राष्ट्रपति के अभिभाषण में एनआरसी का ज़िक्र कैसे आ गया.

 

 ज्ञात रहे कि राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्रीय मंत्रिमंडल लिखता है, उसके बाद देश के गृहमंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया तो अब इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. सरकार ने संसद में भी कहा कि उस का NRC पर अभी कोई विचार नहीं है. वहीं इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह देश और दुनिया को यह क्रोनोलॉजी समझाते नजर आए कि सबसे पहले सीएबी यानी नागरिकता संशोधन बिल आएगा उसके बाद लोगों को नागरिकता दी जाएगी और फिर एनआरसी आएगा और घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा.

 

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार इस में एक विशेष समुदाय का नाम नहीं लिया, जिससे लोगों के मन में शंका आई. जब देश और दुनिया में नागरिकता संशोधन बिल के नागरिकता संशोधन अधिनियम बनने के बाद विरोध शुरू हुआ तो सरकार की तरफ से कहा गया कि यह बिल नागरिकता देने के लिए है नागरिकता लेने के लिए नहीं है.

 

 अब जबकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संप्रभु देश के लिए एनआरसी आवश्यक है और दूसरी तरफ देश करोना जैसी भयंकर वायरस से जूझ रहा है ऐसे में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में यह कहना कि देश के लिए आवश्यक है बहुत सारे सवाल खड़ा करता है. एक तरफ सरकार लोगों को पीएनआरसी और CAA के खिलाफ प्रदर्शनों से हटाने में जुटी है और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार का यह मत बहुत सारे सवाल खड़ा करता है. सरकार ने देश के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी पर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि यह किसी भी संप्रभु देश के लिए आवश्यक अभ्यास है. नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को चैलेंज करने वाली एक याचिका पर बीसी जोशी डायरेक्टर मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स ने सुप्रीम कोर्ट में 17 मार्च को एक एफिडेविट फाइल किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि संप्रभु देश के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन एनआरसी आवश्यक है.

 

 उन्होंने यह भी कहा है कि इसके जरिए से उन नागरिकों को आईडेंटिफाई किया जाएगा जो भारत के हैं और उनसे. ज्ञात रहे कि इस याचिका में सिटीजनशिप एक्ट 1955 के सेक्शन 14A को भी चैलेंज किया गया है जो एनआरसी को कानूनी बैकअप देता है.

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