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अरविंद केजरीवाल की हकीकत, दिल्ली के मुसलमान और बीजेपी व कांग्रेस

By: वतन समाचार डेस्क

BY MOHAMMAD AHMAD

 

नयी दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों जगह-जगह घूम घूम कर भाजपा को हराने की अपील कर रहे हैं. उनका इस बात का दावा है कि भाजपा को सिर्फ आम आदमी पार्टी ही हरा सकती है. कांग्रेस को वोट देने का मतलब वोट कटवाना होगा. वह कांग्रेस पार्टी को एक वोट कटवा पार्टी के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं. उन्होंने दिल्ली के जामिया नगर में बीते दिनों कलीमुल्लहफीज़ (मारूफ शिक्षाविद) की ओर से आयोजित एक प्रोग्राम को संबोधित करते हुए कहा कि सिर्फ माइनॉरिटी वोट  कांग्रेस पार्टी को जाने का डर है. वह माइनॉरिटी माइनॉरिटी करते रहे. बड़ी बात यह है कि उन्होंने परंपराओं के मुताबिक मुस्लिम विद्वानों से अपने लिए खूब तालियां भी बजवाईं.

 

दरअसल ऐसे बहुत कम लोग होंगे जो अरविंद केजरीवाल को क़रीब से जानते हों. मुझे अरविंद केजरीवाल को दो-चार बार करीब से देखने समझने और पढ़ने का मौका मिला. मुझे अच्छी तरह याद है जब आम आदमी पार्टी अपने दूसरे दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी थी उस वक्त अरविंद केजरीवाल मुंबई तशरीफ ले गए थे. इस अवसर पर मुंबई में मुसलमानों ने एक मीटिंग का आयोजन किया गया था. इस मीटिंग में काफी जाने-माने चेहरे उपस्थित थे. इस मीटिंग में अरविंद केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के एक बुजुर्ग नेता से अपील की कि किसी भी तरह से आप दिल्ली में एम आई एम (AIMIM) को लड़ने से रोक दें तो मुसलमानों का वोट नहीं बटेगा और आम आदमी पार्टी जीत जाएगी.

 

 इस मीटिंग में उन्होंने मुसलमानों के इश्यूज पर बात तक नहीं की और बार-बार इसी बात पर चिंता प्रकट करते रहे कि अगर AIMIM आती है तो आम आदमी पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. जब मैंने उस मीटिंग में उनसे सवाल किया तो आयोजकों ने मुझे चुप तो करा दिया लेकिन अरविंद केजरीवाल की मानसिकता सामने आ गई कि उनके दिल में भी मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है.

 

 आम आदमी पार्टी की पीएसी के एक वरिष्ठ नेता ने वतन समाचार से बातचीत में बताया था कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में सिर्फ 4 मुसलमानों को ही टिकट देना चाहते थे. पांचवे मुसलमान को भी टिकट देने के लिए तैयार नहीं थे, जबकि परंपरागत तौर पर कांग्रेस पार्टी 5 मुसलमानों को टिकट देती आई है और दिल्ली की 12 विधान सभा में मुस्लिम 30 फीसद से ऊपर बताये जाते हैं. मीटिंग में उनसे एक नेता ने कहा कि कम से कम 6 मुस्लिम नेताओं को टिकट देने की जरूरत है ताकि हम मुसलमानों का विश्वास प्राप्त कर सकें, उस पर अरविंद केजरीवाल का कहना था कि जब मुसलमान वोट देगा तो उसको टिकट देने की क्या जरूरत है.

 

 अरविंद केजरीवाल की मुस्लिम दोस्ती का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली से आज तक किसी मुस्लिम को लोकसभा का टिकट नहीं दिया. कुछ साल पहले उर्दू के एक अखबार में कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता जगदीश टाइटलर के हवाले से यह खबर प्रकाशित हुई थी कि दिल्ली से मुसलमान लोकसभा का ख्वाब देखना बंद कर दे, जिसके बाद काफी हंगामा भी हुआ था लेकिन कांग्रेस ने परवेज हाशमी की शक्ल में दिल्ली से एक राज्यसभा सांसद मुसलमान को बनाने का काम किया था. हालांकि आम आदमी पार्टी ने इस परंपरा को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया. उसके बावजूद केजरीवाल को मुसलमानों का वोट तो चाहिए लेकिन पावर शेयरिंग में मुसलमान केजरीवाल को क़बूल नहीं है.

 

  दिल्ली से आम आदमी पार्टी किसी मुसलमान को लोकसभा का टिकट देने को तैयार नज़र नहीं आ रही है.

 

कभी हालात का बहाना कभी किसी और का बहाना बना कर टिकट ना दे के लिए हर चीज का सहारा लिया जाता है. जबकि भारतीय जनता पार्टी सिकंदर बख्त की शक्ल में दिल्ली से एक लोकसभा का टिकट दे चुकी है.

 

अब आप खुद सोचिये कि किस पार्टी को वोट देना चाहिए और अरविंद केजरीवाल मुसलमानों के कितने हितैषी हैं, सोचिये गौर कीजिये और फैसला कीजिये.

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