लखनऊ 16 मई 2021। रिहाई मंच ने चित्रकूट जिला जेल में मेराजुद्दीन, मुकीम और अंशू दीक्षित की हत्या पर सवाल किया कि आखिर जेल में कैसे पहुंचा हथियार, वह भी कोराना काल में जब मुलाकात तक बंद है और कैदी अलग-अलग जगहों पर बंद थे। नाइन एमएम की पिस्टल की बात प्रमुखता से आई है तो वहीं जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि कैंदियों में बहस रुकवाने पहुंचे जेल स्टाफ से अंशु ने सर्विस रिवाॅल्वर छीन ली थी। यह भी कहा जा रहा है कि अंशु ने मेराजुद्दीन को मारा फिर मुकीम को। यह भी कहा जा रहा है कि मुकीम को मारने के बाद मेराजुद्दीन के विरोध करने पर उसको मारा। सच के लिए इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के सिंटिग जज के निर्देशन में न्यायिक जांच होनी चाहिए। इसलिए कि अंशु दीक्षित के मारे जाने को लेकर कहा जा रहा है कि उसने कुछ कैदियों को बंधक बना लिया था जिसके बाद पुलिसिया कार्रवाई में वह मारा गया। इस बात पर संदेह पैदा होता है। ऐसा तो नहीं कि तीनों पुलिसिया कार्रवाई में मारे गए और फिर कहानी बनाई गई। जिस तरह मीडिया में आ रहा है कि दोनों को मारते हुए अंशु ने क्या बोला वह एक अच्छी कहानी हो सकती है पर संदेह से परे नहीं। क्योंकि या तो अंशु ने कोई बयान दिया हो पर इसकी कोई बात नहीं आई। यह दूसरा मामला है। ठीक इसी तरह बागपत जेल में नाइन एमएम की पिस्टल से सुनील राठी पर मुन्ना बंजरगी की हत्या का आरोप है।
रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि जेल में हिंसा की जिम्मेदारी जेल प्रशासन और जिला प्रशासन की होती है। जेल में हत्या का होना साफ करता है कि बिना जेल के अधिकारियों की मिलीभगत से यह नहीं हो सकता। इस मामले की हाईकोर्ट के सिटिंग जज में निर्देशन में न्यायिक जांच करवाई की जाए। मीडिया के अनुसार चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी, नाइटविजन बाइनाकुलर की व्यवस्था, ह्यूमन बाॅडी स्कैनर, ड्यूल स्कैनर बैगेज, ड्रोन कैमरा, उच्च क्षमता के हैंड मेटल डिटेक्टर, हाईटेक सुरक्षा वाली जेल में पिस्टल कैसे पहुंची । हाई सिक्योरिटी वाली चित्रकूट की रगौली जेल में पिछले साल कोरोनाकाल से ही बंदियों से मुलाकात बंद है। बावजूद इसके जेल के अंदर अंशुल दीक्षित तक पिस्टल पहुंच गई। जेल की सुरक्षा ही नहीं, इससे वहां के स्टाफ पर भी सवाल खड़े होते हैं।
रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि मेराजुद्दीन के बेटे मिनहाज ने बताया कि 20 मार्च को वाराणसी जेल से चित्रकूट जेल में उनका स्थानांतरण हुआ था। सुरक्षा के लिए डीएम, एसएसपी, जेल डीजी, डीजीपी, उत्तर प्रदेश और कोर्ट से भी मांग की थी। अक्टूबर महीने में और उसके बाद भी कोर्ट से गुहार लगाई थी। वाराणसी में 5 अक्टूबर 2020 से बंद थे। पुलिस चौकी में सेरेण्डर किए थे। दो भाई एक बहन में सबसे बड़े मिनहाज ने इंसाफ की गुहार लगाई।
मुकीम के परिजन साहिल ने बताया कि मुकीम उनके ताया थे। मुकीम की मौत की सूचना 11-12 बजे के करीब किसी ने फोन से दी। वो सवाल करते हैं कि बीड़ी-सिगरेट नहीं ले जा सकते तो हथियार कैसे जेल के अंदर चला गया। 7 तारीख से चित्रकूट में ट्रांसफर के बाद थे। इसके पहले सहारनपुर जेल में थे। एक बार और धमकी मिली थी तो हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। मुकीम के भाई वसीम का भी एनकाउंटर हुआ था। एक मामले में मुकीम के पिता जेल में हैं। हरियाणा से उठाया गया था, गैंगेस्टर लगा दिया है। इसी महीने की 6 तारीख को जेल ट्रांसफर हुआ और इतने दिन में हुई इस घटना पर सवाल करते हैं।
इस मामले में हाईकोर्ट में पिटीशन दाखिल थी। जिसपर हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया था कि सुरक्षा का ख्याल रखा जाए, जो भी प्रोटोकाल हैं उनका पालन किया जाए। कोविड के दौर में आखिर इतनी क्या जल्दबाजी थी जो जेल स्थानांतरण किया गया। जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट कोराना के संक्रमण पर चिंतित होकर कैदियों की रिहाई की बात कर रही है वहां जेल स्थानांतरण की प्रदेश सरकार की यह नीति क्या संक्रमण नहीं फैलाती। वहीं अस्थाई जेल और स्थाई जेल के कैदी होने के बावजूद कैसे दोनों आमने-सामने हुए। क्या कोविड नियमों का पालन जेल में नहीं हो रहा है। दो महीने पहले हरियाणा से लाए जाने की मुकीम की सूचना थी। आखिर इतनी जल्दी-जल्दी जेल स्थानांतरण क्यों हुआ। मुकीम की मां ने अपने बेटे वसीम के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए 156-3 की कोर्ट की कार्रवाई में गई तो उनके ऊपर भी पुलिस का दबाव था और गैर कानूनी तरीके के जेल भी भेजा गया। वसीम एनकाउंटर मामले में पहले उसकी मां को पुलिस ने उठा लिया था और वसीम पर दबाव बनाया गया कि वो आ जाए। आया तो मेरठ एसटीएफ ने उसके एनकाउंटर का दावा किया। यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट में भी है।
मुकीम को कैराना पलायन से जोड़कर प्रचारित करने की कोशिश की जा रही है वह सांप्रदायिक तत्वों की सोची समझी साजिश है। जबकि पूर्व भाजपा सांसद हुकुम सिंह द्वारा कैराना पलायन को लेकर जो सूची जारी की गई थी उस पर भी अनेक सवाल उठ चुके हैं। उसमें कई ऐसे नाम थे जो मृत हो चुके थे। खैर मुख्तार अंसार की करीबी और कैराना पलायन के लिए दोषी के नाम पर किसी के भी संवैधानिक हक को छीना नहीं जा सकता। क्योंकि मेराजुद्दीन और मुकीम के परिजनों ने सुरक्षा के लिए लगातार गुहार लगाई। इससे मुख्तार अंसारी के परिजनों का दावा भी ठोस होता है कि उनकी सुरक्षा खतरे में है।
ताज़ातरीन ख़बरें पढ़ने के लिए आप वतन समाचार की वेबसाइट पर जा सक हैं :
https://www.watansamachar.com/
उर्दू ख़बरों के लिए वतन समाचार उर्दू पर लॉगिन करें :
http://urdu.watansamachar.com/
हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें :
https://www.youtube.com/c/WatanSamachar
ज़माने के साथ चलिए, अब पाइए लेटेस्ट ख़बरें और वीडियो अपने फ़ोन पर :
आप हमसे सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं- ट्विटर :
https://twitter.com/WatanSamachar?s=20
फ़ेसबुक :

यदि आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो आप इसे आगे शेयर करें। हमारी पत्रकारिता को आपके सहयोग की जरूरत है, ताकि हम बिना रुके बिना थके, बिना झुके संवैधानिक मूल्यों को आप तक पहुंचाते रहें।
Support Watan Samachar
100 300 500 2100 Donate now






Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.
Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.